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आरती साहा की जीवनी – Arati Saha Biography Hindi

आरती साहा 1959 में भारत तथा एशिया की पहली महिला इंग्लिश चैनल पार करने वाली प्रसिद्ध तैराक थीं। आरती  साहा भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली एक तैराक है। इसके अलावा वे एक भारतीय महिला खिलाड़ी भी थी। और आरती साहा को पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको आरती साहा की जीवनी – Arati Saha Biography Hindi के बारे में बताएंगे।

आरती साहा की जीवनी – Arati Saha Biography Hindi

आरती साहा की जीवनी

जन्म

आरती साहा का जन्म 24 सितम्बर, 1940 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनके पिता का नाम पंचुगोपाल साहा था। वे एक साधारण बंगाली हिन्दू परिवार से सम्बंध रखती था। उनका पूरा नाम आरती साहा गुप्ता था । आरती अपने पिता की तीन संतानों में दूसरी और दो बहनों में बड़ी थीं। उनके पिता सशस्त्र बल में एक साधारण कर्मचारी थे। जब आरती ढाई साल की थीं, तभी उनकी माता का देहान्त हो गया। उनके बड़े भाई छोटी बहन भारती को मामा के यहाँ रखा गया, जबकि आरती अपनी दादी के पास रहीं। आरती साहा के पति का नाम डॉ अरुण कुमार है। 1959 में आरती ने डॉ अरुण कुमार से शादी की और इनकी एक संतान है जिसका नाम अर्चना है।

शिक्षा

जब वह चार वर्ष की थी, तब वह अपने चाचा के साथ को चंपताला घाट पर जाती और वही उन्होंने तैरना सीख लीया था। उनकी रूचि देखते हुए उनके चाचा ने उन्हें Hatkhola स्विमिंग क्लब में भर्ती किया। 1946 में, पांच वर्ष की आयु में, शैलेंद्र मेमोरियल तैराकी प्रतियोगिता में 110 स्वर्ण गगन के फ्रीस्टाइल में उन्होंने स्वर्ण जीता। यह उनके स्विमिंग करियर की शुरुआत थी।आरती ने इंटरमीडिएट की पढाई सिटी कॉलेज से पूरी की ।

करियर

  • कलकत्ता,पश्चिम बंगाल की मूल निवासी आरती ने चार वर्ष की उम्र से ही तैराकी शुरु कर दी थी। सचिन नाग ने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना और उसे तराशने का कार्य शुरु किया। 1949 में आरती ने अखिल भारतीय रिकार्ड सहित राज्यस्तरीय तैराकी प्रतियोगिताओं को जीता। उन्होंने 1952 में हेलसिंकी ओलंपिक में भी भाग लिया।
  • भारतीय पुरुष तैराक मिहिर सेन से प्रेरित होकर उन्होंने इंग्लिश चैनल पार करने की कोशिश की और 29 सितम्बर 1959 को वे एशिया से ऐसा करने वाली प्रथम महिला तैराक बन गईं। उन्होंने 42 मील की  दूरी 16 घंटे 20 मिनट में तैय की।
  • इंग्लैंड के तट पर पहुंचने पर, उन्होंने भारतीय ध्वज फहराया विजयालक्ष्मी पंडित उसे बधाई देने वाले पहले व्यक्ति थे। जवाहर लाल नेहरू और कई प्रतिष्ठित लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर उन्हें बधाई दी और 30 सितंबर को ऑल इंडिया रेडियो ने आरती साहा की उपलब्धि की घोषणा की।

सम्मान

  • आरती साहा को 1960 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • 1998 में भारतीय डाक विभाग द्वारा कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल करने वाली भारतीय महिलाओं की स्मृति में जारी डाक टिकटों के समूह में आरती शाहा पर भी एक टिकट जारी किया गया था।

मृत्यु

आरती साहा को पीलिया  होने के कारण 23 अगस्त 1994 को उनकी मृत्यु हो गई थी ।

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