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बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी – Bankim Chandra Chattopadhyay Biography Hindi

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाली भाषा के महान कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार थे। उन्होंने 1865 में अपना पहला उपन्यास ‘दुर्गेश नन्दिनी’ लिखा। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 20 दिसंबर 1876 में राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना की। जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी – Bankim Chandra Chattopadhyay Biography Hindi के बारे में बताएगे।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी – Bankim Chandra Chattopadhyay Biography Hindi

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी - Bankim Chandra Chattopadhyay Biography Hindi

जन्म

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 26 जून 1838 को उत्तरी चौबीस परगना के कंठालपाड़ा, नैहाटी में एक परंपरागत और समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था।

शिक्षा

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की शिक्षा हुगली कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता में हुई। उन्होने 1857 में  बीए पास किया और 1869 में क़ानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद में उन्होने सरकारी नौकरी कर ली और 1891 में सरकारी सेवा से रिटायर हुए।

राष्ट्र भक्ति

बंकिमचंद्र का जन्म उस काल में हुआ जब बंगला साहित्य का न कोई आदर्श था और न ही रूप या सीमा का कोई विचार। ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रगीत के रचयिता होने के नाते वे बड़े सम्मान के साथ सदा याद किए जायेंगे। उनकी शिक्षा बंगला के साथ-साथ अंग्रेज़ी व संस्कृत में भी हुई थी। आजीविका के लिए उन्होंने सरकारी सेवा की, परन्तु राष्ट्रीयता और स्वभाषा प्रेम उनमें कूट-कूट कर भरा हुआ था। युवावस्था में उन्होंने अपने एक मित्र का अंग्रेज़ी में लिखा हुआ पत्र बिना पढ़े ही इस टिप्पणी के साथ लौटा दिया था कि, ‘अंग्रेज़ी न तो तुम्हारी मातृभाषा है और न ही मेरी’। सरकारी सेवा में रहते हुए भी वे कभी अंग्रेज़ों से दबे नहीं।

साहित्य क्षेत्र में प्रवेश

बंकिम ने साहित्य के क्षेत्र में कुछ कविताएँ लिखकर प्रवेश किया। उस समय बंगला में गद्य या उपन्यास कहानी की रचनाएँ कम लिखी जाती थीं। बंकिम ने इस दिशा में पथ-प्रदर्शक का काम किया। 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने ‘दुर्गेश नंदिनी’ नाम का उपन्यास लिखा। इस ऐतिहासिक उपन्यास से ही साहित्य में उनकी धाक जम गई। फिर उन्होंने ‘बंग दर्शन’ नामक साहित्यिक पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ किया। रबीन्द्रनाथ ठाकुर ‘बंग दर्शन’ में लिखकर ही साहित्य के क्षेत्र में आए। वे बंकिम को अपना गुरु मानते थे। उनका कहना था कि, ‘बंकिम बंगला लेखकों के गुरु और बंगला पाठकों के मित्र हैं’।

रचनाएँ

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पहचान बांग्ला कवि, उपन्यासकार, लेखक और पत्रकार के रूप में है। उनकी प्रथम प्रकाशित रचना राजमोहन्स वाइफ थी। इसकी रचना अंग्रेजी में की गई थी। उन्होंने 1865 में अपना पहला उपन्यास ‘दुर्गेश नन्दिनी’ लिखा। यह एक रूमानी रचना है। उनकी अगली रचना का नाम कपालकुंडला (1866) है। इसे उनकी सबसे अधिक रूमानी रचनाओं में से एक माना जाता है। उन्होंने 1872 में मासिक पत्रिका बंगदर्शन का भी प्रकाशन किया। अपनी इस पत्रिका में उन्होंने विषवृक्ष (1873) उपन्यास का क्रमिक रूप से प्रकाशन किया। कृष्णकांतेर विल में चट्टोपाध्याय ने अंग्रेजी शासकों पर तीखा व्यंग्य किया है।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 20 दिसंबर 1876 में राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना की। जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। आनंदमठ (1882) राजनीतिक उपन्यास है। इस उपन्यास में उत्तर बंगाल में 1773 के संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में देशभक्ति की भावना है। चट्टोपाध्याय का अंतिम उपन्यास सीताराम (1886) है। इसमें मुस्लिम सत्ता के प्रति एक हिंदू शासक का विरोध दर्शाया गया है।

उनके अन्य उपन्यासों में दुर्गेशनंदिनी, मृणालिनी, इंदिरा, राधारानी, कृष्णकांतेर दफ्तर, देवी चौधरानी और मोचीराम गौरेर जीवनचरित शामिल है। उनकी कविताएं ललिता ओ मानस नामक संग्रह में प्रकाशित हुई। उन्होंने धर्म, सामाजिक और समसामायिक मुद्दों पर आधारित कई निबंध भी लिखे।

बंकिमचंद्र के उपन्यासों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया गया। बांग्ला में सिर्फ बंकिम और शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय को यह गौरव हासिल है कि उनकी रचनाएं हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं में आज भी चाव से पढ़ी जाती है। लोकप्रियता के मामले में बंकिम और शरद और रवीन्द्र नाथ टैगोर से भी आगे हैं। बंकिम बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकार थे। उनके कथा साहित्य के अधिकतर पात्र शहरी मध्यम वर्ग के लोग हैं। इनके पात्र आधुनिक जीवन की त्रासदियों और प्राचीन काल की परंपराओं से जुड़ी दिक्कतों से साथ साथ जूझते हैं। यह समस्या भारत भर के किसी भी प्रांत के शहरी मध्यम वर्ग के समक्ष आती है। लिहाजा मध्यम वर्ग का पाठक बंकिम के उपन्यासों में अपनी छवि देखता है।

उपन्यास

  • दुर्गेशनन्दिनी
  • कपालकुण्डला
  • मृणालिनी
  • बिषबृक्ष
  • इन्दिरा
  • युगलांगुरीय
  • चन्द्रशेखर
  • राधारानी
  • रजनी
  • कृष्णकान्तेर उइल
  • राजसिंह
  • आनन्दमठ
  • देबी चौधुरानी
  • सीताराम
  • उपकथा (इन्दिरा,युगलांगुरीय और राधारानी त्रयी संग्रह)
  • Rajmohan’s Wife

प्रबन्ध ग्रन्थ

  • कमलाकान्तेर दप्तर
  • लोकरहस्य
  • कृष्ण चरित्र
  • बिज्ञानरहस्य
  • बिबिध समालोचना
  • प्रबन्ध-पुस्तक
  • साम्य
  • कृष्ण चरित्र
  • बिबिध प्रबन्ध

विविध

  • ललिता (पुराकालिक गल्प)
  • धर्म्मतत्त्ब
  • सहज रचना शिक्षा
  • श्रीमद्भगबदगीता
  • कबितापुस्तक (किछु कबिता, एबं ललिता ओ मानस)

सम्पादित ग्रन्थावली

  • दीनबन्धु मित्रेर जीबनी
  • बांगला साहित्ये प्यारीचाँद मित्रेर स्थान
  • संजीबचन्द्र चट्टोपाध्यायेर जीबनी

मृत्यु

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की मृत्यु  8 अप्रैल 1894 को हुई।

Sonu Siwach

नमस्कार दोस्तों, मैं Sonu Siwach, Jivani Hindi की Biography और History Writer हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक Graduate हूँ. मुझे History content में बहुत दिलचस्पी है और सभी पुराने content जो Biography और History से जुड़े हो मैं आपके साथ शेयर करती रहूंगी.

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