बुला चौधरी की जीवनी – Bula Choudhury Biography Hindi

August 23, 2019
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बुला चौधरी एक लंबी दूरी तय करने वाली तैराक है। वह विश्व की पहली ऐसी महिला है। जिन्होंने 5 महाद्वीपों के सातों समुंदर तैरकर पार किए हैं और अपनी जीत हासिल की है। बुला चौधरी ने जो जिब्राल्टर जलडमरूमध्य को तैरकर 3 घंटे 35 मिनट के रिकॉर्ड समय में पार कर लिया था। जो आज भी एक विश्व रिकॉर्ड बना हुआ है। तो आइए आज हम आपको बुला चौधरी की जीवनी – Bula Choudhury Biography Hindi के बारे में बताएंगे.

बुला चौधरी की जीवनी – Bula Choudhury Biography Hindi

बुला चौधरी की जीवनी

जन्म

बुला चौधरी का जन्म 2 जनवरी 1970 को कोलकाता में हुआ था। उनका पूरा नाम बुला चौधरी चक्रवर्ती है। बुला चौधरी जब 9 वर्ष की थी, तब उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और उसमें जीत हासिल की। इसके बाद में वे पहली बार सुर्खियों में आई। उन्होंने अपने आयु वर्ग के सभी प्रतियोगिताएं जीतकर एकसाथ 6 स्वर्ण पदक जीते थे और 24 वर्षों के करियर में बुला चौधरी सात समुंदर और पांच महाद्वीपों के जलडमरूमध्य को पार करने वाली विश्व की पहली महिला बन गई

बुला चौधरी के पति का नाम जो उनके कोच भी है संजीव चक्रवर्ती और उनके बेटे का नाम सर्बूजी है।

24 अगस्त 2004 को बुला चौधरी ने अपने करियर के उस विशेष मुकाम को पूरा किया। जब 24 अगस्त, 2004 को उन्होंने श्रीलंका में तलाईमन्नार से तमिलनाडु के घनुष्कोटि तक की पाल्क स्ट्रेट की 40 कि.मी. दूरी 13 घंटे 54 मिनट में तैरकर तय की। उस समय वह 34 वर्ष की थीं । उनके तैराकी के दौरान समुंदर में बहुत भयानक हो गया था। तेज हवाएं चलने लगी और 1 किलोमीटर तक उन्हें बारिश का सामना करना।

गिनीज बुक में रिकॉर्ड

1989 में इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया था। इसके बाद में बुला ने अपनी तैराकी को फिर से दोहराते हुए 1999 में दोबारा इंग्लिश चैनल पार किया। वह दो बार इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली एशियाई महिला बनी।

बुला चौधरी लंबी दूरी की तैराकी करने के लिए कमर कस कर तैयार हो गई। उन्होंने तय किया कि वह लंबी दूरी की तैराकी पूरी करके रिकॉर्ड बनाएगी और उन्होंने अगस्त 2000 में जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (स्पेन) की। उनकी इस  तैराकी के समय उनके पति और कोच संजीव चक्रवर्ती और उनका 10 वर्षीय बेटा सर्बूजी उनके साथ कोलंबो आए थे। बुला चौधरी के कहने के अनुसार “यह तैराकी सातों समुद्रों में सबसे कठिन थी। सभी भारतीयों की शुभकामनाओं से मैं यह पूरी पार कर सकी और गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना स्थान बना सकी”। उनके इस तैराकी को सहारा इंडिया ने स्पॉन्सर किया था.

उपलब्धियां

  • मात्र 9 वर्ष की आयु में बुला ने राष्ट्रीय तैराकी चैंपियनशिप जीती।
  • 9 वर्ष की आयु में अपने आयु वर्ग के सभी प्रतियोगिता जीतकर छह स्वर्ण-पदक प्राप्त किए।
  • बुला ने सातों समुद्र और पांचों महाद्वीप के जलडमरूमध्य पार कर रिकार्ड बनाया है।
  • उन्हें ‘जलपरी’ की उपाधि दी गई है।
  • उन्होंने जिब्राल्टर जलडमरूमध्य विश्व रिकॉर्ड समय 3 घंटे 35 मिनट तैर कर पार किया था।
  • उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
  • बुला चौधरी को 2002 में तेंन्जिंग नोर्गे एडवेंचर अवार्ड प्रदान किया गया।

पुरस्कार

  • 1990 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ दिया गया और उन्हें ‘जलपरी‘ की उपाधि भी दी गई।
  • 2003 में ‘ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया
  • ‘जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (स्पेन)’ (2000)

अंतरराष्ट्रीय  स्तर

बुला चौधरी दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन के पास थी एंकरस बे से रोबिन आईलैंड पार करने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं, जिन्होंने पांचों महाद्वीपों के समुन्द्र पार किए। उन्होंने ठंडे अन्टार्कटिका पानी में 30 किलोमीटर की दूरी 3 घंटे 26 मिनट में पूरी करके एक नया कीर्तिमान कायम किया। वह इस दूरी को पार करने वाली न सिर्फ प्रथम एशियाई महिला ही नहीं थीं बल्कि इतने कम समय में पार करने वाली पहली महिला भी थीं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के समुद्र की यह तैराकी सुबह 10 बजे शुरू करके दोपहर 1:26 पर समाप्त कर दी। उन्होंने शार्क मछलियों से भरे इस अन्टार्कटिका पानी में पहले से ही तैराकी का अभ्यास किया था। इसी कारण वह इस अति कठिन समझी जाने वाली दूरी को तैर कर पार कर सकीं

  • उन्होंने अगस्त 2000 में जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (स्पेन) की लंबी दूरी की तैराकी पार की। इसे उन्होंने 3 घंटे 35 मिनट के रिकॉर्ड समय में पार कर लिया था जो आज भी एक विश्व रिकॉर्ड है। जिब्राल्टर स्ट्रेट स्पेन से मोरक्को तक है, जिसकी दूरी 20 किलोमीटर है।
  • 2001 में इटली का तिरानियन समुद्र पार किया।
  • फिर 2002 में ही उन्होंने अमेरिका में केटेलिना चैनल पार किया।
  • 2003 में उन्होंने न्यूजीलैंड में कुक्स जलडमरूमध्य पार किया।
  • जुलाई 2002 में बुला ने ग्रीस का टोरोनोज गल्फ पार किया जिसकी दूरी 26 किलोमीटर थी। ग्रीस का छोटा शहर मैसीडोनिया के पास निकिती चाकिडिंको से तैराकी शुरू करके कसान्ड्रा तक की दूरी उन्होंने 8 घंटे 11 मिनट में पूरी की। यह सात समुद्र पार करने के स्वप्न में चौथी तैराकी थी। वह अपने साथ तैरने वाले 29 तैराकों में से सातवें स्थान पर रहीं। मौसम और हवाओं की बाधा को पार करते हुए उन्होंने यह दूरी तय की थी।

अगस्त 2004 में जब बुला ने श्रीलंका से तमिलनाडु (भारत) के बीच की पाल्कस्ट्रेट पार कर ली तब उन्होंने प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा- ”यह रिकॉर्ड बनाकर मेरा सपना पूरा हो गया है। श्रीलंका की तरफ से आधी दूरी तक हवाएं और लहरें दोनों ही भारी थीं अत: मुझे काफ़ी चैलेंज का सामना करना पड़ा। धनुष्कोटि के पास पांच किलोमीटर तक इतनी हवा और लहरें थीं कि मुझे यह दूरी तय करने में दो घंटे से अधिक का समय लग गया

”लेकिन जब मैंने अपनी मातृभूमि के किनारों को छुआ तो मैं खुशी से फूली नहीं समा रही थी, मानों मैं दुनिया के ऊपरी सिरे पर पहुंच गई हूँ, लेकिन यह सब मेरे पति व कोच संजीव चक्रवर्ती और मेरे बेटे के सहयोग से पूर्ण हो सका।” उनके पति जो पहले अन्तरराष्ट्रीय तैराक भी रह चुके हैं, का कहना था कि बुला को सफलता इस कारण मिल सकी कि उसने सुबह छह बजे के स्थान पर सुबह 2 बजे तैराकी शुरू की।

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