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Biography Hindi

दादा लख्मीचंद की जीवनी – Haryanvi Shakespeare Lakhmi Chand Biography Hindi

हरियाणा के शेक्सपियर और सूर्य कवी कहे जाने वाले पंडित लख्मीचंद एक बहुत ही अच्छे कवि और गायन कला में निपुण थे, उन्होंने ब्रहम ज्ञान जैसे सांग की रचना की थी. इस आर्टिकल में हम आपको दादा लख्मीचंद की जीवनी – Haryanvi Shakespeare Lakhmi Chand Biography Hindi के बारे में बताने जा रहे हैं.

दादा लख्मीचंद की जीवनी – Haryanvi Shakespeare Lakhmi Chand Biography Hindi

दादा लख्मीचंद की जीवनी

जन्म

पंडित लखमी चंद का जन्म सन 1901 जांटी कला सोनीपत में हुआ था. उनके पिता का नाम उदमी राम था. उनके पिता एक सामान्य किसान थे और उनका परिवार बहुत ही निर्धन था जिसकी वजह से उनका बालकपन बहुत ही कठिनाइयों से गुजरा था.

शिक्षा

निर्धन परिवार होने की वजह से पंडित लख्मीचंद पाठशाला नहीं जा पाए और उन्होंने पशु चराने का कार्य करना शुरू किया और पाली की तरह अपना जीवन व्यतीत करने लगे.

योगदान

बालकपन से ही पंडित लख्मीचंद कुछ पंक्तियां याद करके पशु चराते-चराते उनको गुनगुनाए करते थे. जैसे ही वह धीरे धीरे अलग-अलग जगह पर जाने लगे और अपनी धुन गुनगुनाने लगे तो उनको गायन की मान्यता मिलने लगी, जिसकी वजह से कुछ भजनी और सांगी उनको साथ ले जाया करते थे. परिवार वालों को इस के शौक की वजह से काफी चिंता में रहना पड़ा लेकिन लख्मीचंद गायन में मगन रहते थे.

कहते हैं कि एक बार गांव में कोई शादी थी, वहां पर किसी प्रसिद्ध कवि और गायक का आना था जिनका नाम मानसिंह था, तो वहां पर पंडित लख्मीचंद चले गए और मानसिंह से प्रभावित होकर पंडित लख्मीचंद ने उनके सारे भजन सुने और उन्होंने मानसिंह को अपना गुरु बना लिया जिसके बाद में वह उनसे औपचारिक शिक्षा लेते रहे.

उस समय अभिनय और सांग को अच्छा नहीं माना जाता था जिसकी वजह से लख्मीचंद को काफी परेशानी हुई थी लेकिन लख्मीचंद धुन के पक्के थे उन्होंने मेहंदीपुर के श्री चंद सांगी के सॉन्ग मंडली में सम्मिलित हुए औए अपनी प्रतिभा को और निखारने के लिए सोहनकुंड वाला के साथ काम करने लगे.

लख्मीचंद ने कई कलाकारों से अपने सानिध्य रखा, लेकिन फिर भी वह अपने मान सिंह को अपना गुरु मानते थे. इसी बीच एक समारोह में सोहनकुंड वाला ने मानसिंह के अपमान में कुछ शब्द कहे जिसकी वजह से लख्मीचंद नाराज होकर उनसे अलग होकर सांग करने लगे.

लख्मीचंद द्वारा लिखे गए सांग

उन्होंने 20 से भी अधिक सांगों की रचना की थी जिनमें से प्रमुख है-

  • नौटंकी
  • शाही लकडहारा
  • राजा भोज
  • चंद्रकिरण
  • हीर-रांझा
  • चाप सिंह
  • नल-दमयंती
  • सत्यवान सावित्री
  • मीराबाई
  • पद्मावत

निधन

पंडित लख्मीचंद का निधन 1945 में हुआ था, जिसके बाद में हरियाणा साहित्य अकादमी ने लख्मीचंद ग्रंथावली प्रकाशित की

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