एन. आर. नारायणमूर्ति की जीवनी – N. R. Narayana Murthy Biography Hindi

August 22, 2019
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एन आर नारायणमूर्ति इन्फोसिस के संस्थापक है। उन्होने अपने करियर की शुरुवात अहमदाबाद में IIM का चीफ सिस्टम प्रोग्रामर बनकर की। नारायण मूर्ति और उनके जैसे ही छह सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स ने 1981 में इन्फोसिस की स्थापना की, जिसमे उस समय उन्होंने अपनी कंपनी में 10000 रुपयों की पूँजी लगायी थी, यह पूँजी उन्हें उनकी पत्नी सुधा मूर्ति ने दी थी। 1981 से 2002 तक उन्होने इन्फोसिस के सीईओ और 2002 से 2011 तक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। भारत में आउटसोर्सिंग में उनके योगदान के कारण टाइम पत्रिका द्वारा उन्हें “भारतीय आईटी क्षेत्र के पिता” के रूप में वर्णित किया गया है। आज इसके कर्मचारियों की संख्या 50 हजार से अधिक है और 12 देशों में इसकी शाखाएँ है। अभी इस कफ़नी की नेटवर्थ 2.7 लाख करोड़ रुपए है। नारायणमूर्ति को पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको एन. आर. नारायणमूर्ति की जीवनी – N. R. Narayana Murthy Biography Hindi के बारे में बताएगे।

एन. आर. नारायणमूर्ति की जीवनी – N. R. Narayana Murthy Biography Hindi

एन. आर. नारायणमूर्ति की जीवनी - N. R. Narayana Murthy Biography Hindi

जन्म

एन आर नारायणमूर्ति का जन्म 20 अगस्त 1946 को सिद्लाघत्ता ग्राम , कोलर जिला ( चिकबबलपुरा जिला), कर्नाटक में हुआ था। उनका पूरा नाम नागवार रामाराव नारायण मूर्ति है। नारायण मूर्ति के पिता का नाम नागावार रामाराव था जो हाई स्कूल में टीचर थे जिसमे वो गणित और जीव विज्ञान पढ़ाते थे। उनकी पत्नी का नाम सुधा मूर्ति उर्फ़ कुलकर्णी है। उनके दो बच्चे है जिनका नाम बेटा रोहन और बेटी अक्षता मूर्ति है। सुधा मूर्ति एक सोशल वर्कर और लेखिका है।

शिक्षा

एन आर नारायणमूर्ति ने प्रारंभिक स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, वे इंडियन इंस्टिट्यूट और टेक्नोलॉजी की परीक्षा देने गये लेकिन उसमे वे किसी कारण से उपस्थित नही हो सके। बाद में वहा जाने की बजाये वे नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग में दाखिल हुए और 1967 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन में डिग्री प्राप्त की। 1969 में उन्होंने कानपूर के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से मास्टर डिग्री भी प्राप्त कर ली।

करियर

  • नारायण मूर्ति ने अपने करियर की शुरुवात अहमदाबाद में IIM का चीफ सिस्टम प्रोग्रामर बनकर की। वहाँ पर वे भारत के पहले शेयरिंग कंप्यूटर सिस्टम पर काम कर रहे थे और भारत के इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन के लिए BASIC (बेसिक) इंटरप्रेटर को डिजाईन कर रहे थे। बाद उन्होंने एक कंपनी शुरू की जिसका नाम सोफ्ट्रोनिक था। लेकिन जब सिर्फ देड साल में ही कंपनी असफल हुई, तो वे पुणे के पटनी कंप्यूटर सिस्टम में भर्ती हुए।
  • नारायण मूर्ति और उनके जैसे ही छह सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स ने 1981 में इन्फोसिस की स्थापना की, जिसमे उस समय उन्होंने अपनी कंपनी में 10000 रुपयों की पूँजी लगायी थी, यह पूँजी उन्हें उनकी पत्नी सुधा मूर्ति ने दी थी।
  • उन्होने  21 सालो तक 1981 से 2002 तक इन्फोसिस की सीईओ बनकर सेवा की और बाद में उन्होंने नंदन निलेकनी को अपने पद का उत्तराधिकारी बनाया।
  • इन्फोसिस में काम करते समय उन्होंने भारतीय आईटी के विकास के लिये वैश्विक स्तर पर चलने वालो मॉडल्स का निर्माण किया।
  • 2002 से 2006 तक वे बोर्ड के चेयरमैन थे, बाद में वे बोर्ड और मुख्य सलाहकार समिति के भी चेयरमैन बने।
  • अगस्त 2011 में, चेयरमैन के पद पर रहते हुए वे कंपनी से सेवानिर्वृत्त हो गये।
  • HSBC के कॉर्पोरेट बोर्ड की उन्होंने एक आज़ाद डायरेक्टर की तरह सेवा की और इसके साथ ही DBS बैंक, यूनिलीवर, आईसीआईसीआई और NDTV के लिए डायरेक्टर के रूप में कार्य किया।
  • वे भारत की बहोत सी प्रसिद्ध शिक्षा संस्थाओ और समाजसेवी संस्थाओ की सलाहकार समिति के  सदस्य भी है। जिसमे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, INSEAD, ESSEC, फोर्ड फाउंडेशन, UN फाउंडेशन, इंडो-ब्रिटिश पार्टनरशिप, एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट इत्यादि शामिल है। भारत सरकार के पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के वे चेयरमैन भी है।
  • नारायण मूर्ति ब्रिटिश टेलीकम्यूनिकेशन की सलाहकार समिति के एशिया क्षेत्र के मुख्य सलाहकार भी माने जाते है।
  • इसके साथ ही सन 2012 में फार्च्यून पत्रिका ने दुनिया के मुख्य 12 उद्योगपतियों की सूचि में मूर्ति को भी शामिल किया था।
  • 1 जून 2013 को मूर्ति इन्फोसिस वापिस आये और उन्होंने एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और एडिशनल डायरेक्टर का पद संभाला।
  • 12 जून 2014 को उन्होंने अपना एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद छोड़ने की घोषणा की जिसे 14 जून से लागु किया गया। लेकिन 12 अक्टूबर तक उन्होंने नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनकर सेवा जरुर की।
  • 11 अक्टूबर को, मूर्ति ने हमेशा के लिये चेयरमैन के पद को छोड़ दिया। एन. आर. नारायणमूर्ति की जीवनी – N. R. Narayana Murthy Biography Hindi
  • 2014 को CNBC ने मूर्ति को उन लोगो की सूचि में 13 वे स्थान पर रखा था जिन्होंने पिछले 25 सालो में अपने कामो से पूरी दुनिया के लोगो को प्रभावित किया था। इतना ही नहीं, द इकोनॉमिस्ट ने उन्हें 2005 के दुनिया के 10 सबसे महान बिज़नस कार्यकर्त्ता की सूचि में शामिल किया था।
  • मार्च 2015 को टाइम्स पत्रिका ने मूर्ति को दुनिया के टॉप 10 “बिज़नस पायनियर्स इन टेक्नोलॉजी” की सूचि में शामिल किया था।
  • आज इसके कर्मचारियों की संख्या 50 हजार से अधिक है।
  • अभी इस कफ़नी की नेटवर्थ 2.7 लाख करोड़ रुपए है।

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लोगों के लिए बने आदर्श

मुंबई के एक अपार्टमेंट में शुरू हुई एक कंपनी की प्रगति की कहानी आज सारी दुनिया जानती है। इन्फोसिस की स्थापना करने के बाद उसके विकास में उनके सभी साथियों ने काफी मनेहत की थी। उन सभी साथियों की कड़ी महेनत रंग लाई और बाद में इन्फोसिस पब्लिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित हो गयी। 1999 में कंपनी ने एक नया इतिहास रचा जब इसके शेयर अमेरिकी शेयर बाज़ार NASDAQ में रजिस्टर हुए।

इन्फोसिस में काम करते हुए भारत में आईटी क्षेत्र का विकास करने के उद्देश से मूर्ति में काफी मॉडल्स का विकास किया और उन्हें नए तरह से डिजाईन भी किया। उनके अथक प्रयासों से भारतीय आईटी उद्योग ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने भारत सरकार के बहोत से कामो में भी सहायता की। इसके साथ ही बहोत से एशियाई देशो के वे आईटी सलाहकार भी है।

सन 2005 में नारायण मूर्ति को विश्व का आठवा सबसे बहेतरीन प्रबंधक चुना गया। आज एन. आर. नारायण मूर्ति अनेक लोगो के आदर्श है। लोगो का ऐसा कहना है की उन्होंने जो भी कुछ कमाया है वह मूर्ति की कंपनी इन्फोसिस के शेयरों की बदौलत और उन्होंने अपनी सारी कमाई इन्फोसिस को ही दान कर दी। स्थानिक लोग तो नारायण मूर्ति को भगवान् की तरह पूजते है। उन्हें पद्म श्री, पद्म विभूषण और ऑफिसर ऑफ़ द लेजियन ऑफ़ ऑनर – फ्रांस सरकार, के सम्मानों से अलंकृत किया जा चूका है।

विचार

  • एक साफ अंतःकरण दुनिया का सबसे नर्म तकिया है।
  • चरित्र + अवसर = सफलता
  • हम ईश्वर में यकीन रखते हैं, बाकी सभी तथ्य जमा करते हैं।
  • रदर्शन पहचान दिलाता है। पहचान से सम्मान आता है। सम्मान से शक्ति बढ़ती है। शक्ति मिलने पर विनम्रता और अनुग्रह का भाव रखना किसी संगठन की गरिमा को बढ़ाता है।
  • जब संदेह में हों, तो बता दें।
  • पैसे की असली शक्ति इसे दान देने की शक्ति का होना है।
  • मैं चाहता हूँ कि इनफ़ोसिस एक ऐसी जगह बने जहाँ विभिन्न लिंग, राष्ट्रीयता, जाति और धर्म के लोग तीव्र प्रतिस्पर्धा लेकिन अत्यंत सद्भाव, शिष्टाचार और गरिमा के वातावरण में एक साथ काम करें और दिन प्रतिदिन हमारे ग्राहकों के काम में अधिक से अधिक मूल्य जोड़ें।
  • प्रगति अक्सर मन और मानसिकता के अंतर के बराबर होती है।
  •  हमारी संपत्ति हर शाम दरवाजे से बाहर निकलती है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि वो अगली सुबह वापस आ जाए।

पुरस्कार और  सम्मान –

भारत सरकार ने भारतीय आईटी क्षेत्र में उनके अतुल्य योगदान के लिये उन्हें पद्म विभूषण और पद्म श्री से नवाजा। उनको मिले पुरस्कार इस प्रकार है –

  • भारत सरकार ने उन्हे 2000 ने पद्म श्री से नवाजा गया।
  • 2007 – कमांडर ऑफ़ आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश शासन (CB) – UK सरकार
  • भारत सरकार ने मूर्ति को 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 2008 में उन्हे सबसे बड़े समूह के ऑफिसर का सम्मान ऑफिसर ऑफ़ द लेजियन ऑफ़ ऑनर फ्रांस सरकार द्वारा दिया गया।
  • 2012 – हुवर मेडल – अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियरिंग
  • 2013 – वैश्विक स्तर पर 25 वे स्थान पर काबिज सबसे महान भारतीय – NDTV
  • 2013 – साल के सबसे बड़े मानवप्रेमी – द एशियन अवार्ड
  • 2013 – सयाजी रत्न अवार्ड – बरोदा मैनेजमेंट एसोसिएशन, वड़ोदरा
  • 2014  – CIF चंचलानी ग्लोबल इंडियन अवार्ड – कनाडा इंडिया फाउंडेशन (इस पुरस्कार में ट्रॉफी और 50,000 अमेरिकी डॉलर का नकद पुरस्कार दिया जाता है)

पुस्तक

  • Behatar Bharat, Behatar Duniya – 2009
  • A Clear Blue Sky: Stories and Poems on Conflict and Hope – 2010
  • Behtar Bharat, Behtar Duniya

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