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पीलू मोदी की जीवनी – Piloo Modi Biography Hindi

पीलू मोदी (English – Piloo Modi) स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता थे। वे पारसी धर्म के अनुयायी थे। पीलू मोदी ‘स्वतंत्र पार्टी’ के संस्थापक थे। वे गुजरात राज्य से चुनाव लड़कर सांसद बने थे। आपातकाल (भारत) के समय 1975 में इन्दिरा गांधी ने पीलू मोदी को मीसा के अन्तर्गत गिरफ्तार करवा लिया था।

पीलू मोदी की जीवनी – Piloo Modi Biography Hindi

Piloo Modi Biography Hindi
Piloo Modi Biography Hindi

संक्षिप्त विवरण

नामपीलू मोदी
पूरा नाम, वास्तविक नाम
पीलू मोदी
जन्म14 नवंबर, 1926
जन्म स्थानमुम्बई, महाराष्ट्र
पिता का नामसर होमी मोदी
माता का नामजेराबाई
राष्ट्रीयता भारतीय
मृत्यु
29 जनवरी, 1983
मृत्यु स्थान

जन्म

पीलू मोदी का जन्म 14 नवम्बर, 1926 एक मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सर होमी मोदी और उनकी माता  का नाम लेडी ‘जेराबाई’ थीं। इनके दो भाई रूसी मोदी और काली मोदी थे। इनकी पत्नी का नाम ‘वीना’ था।

शिक्षा

Piloo Modi की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के ‘दून स्कूल’ में हुई और इसके बाद उनकी उच्चतर शिक्षा बर्कली के ‘कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय’ में हुई जहाँ उन्होने वास्तुकला (आर्किटेक्चर) का अध्ययन किया।

करियर

पीलू मोदी ‘स्वतंत्र पार्टी’ के संस्थापक थे। यह गुजरात से चुनाव लड़कर सांसद बने फिर संसद से एक साल की अनुपस्थिति के बाद, 10 अप्रैल 1978 को यह राज्यसभा में शामिल हो गए और 1983 में अपने अतिम समय तक वहां कार्य किया।

संसद में पीलू मोदी

स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक पीलू मोदी किसी भी समय सदन का माहौल हल्का करने में माहिर थे, लेकिन अपनी अंग्रेजी की महारत से वह कई बार पीठासीन अधिकारी के कोप से बच भी जाते थे। एक बार पीलू सदन में बोल रहे थे। जेसी जैन उन्हें लगातार टोक रहे थे। पीलू मोदी ने झल्लाकर कहा स्टॉप बार्किंग (भौंकना बंद करो)। जैन ने आपत्ति की कि उन्हें कुत्ता कहा जा रहा है। इस पर पीठासीन अधिकारी ने इस टिप्पणी को कार्यवाही से निकाल दिया। पीलू कहां चुप रहने वाले। उन्होंने फिर कहा देन स्टॉप ब्रेयिंग (गधे की तरह रेंकना)। जैन की समझ में नहीं आया और यह टिप्पणी कार्यवाही का हिस्सा रह गई। पीलू मोदी अपने पर भी हंस सकते थे। एक दिन सदन में उन्हें एक सदस्य ने टोका कि पीठासीन अधिकारी की तरफ अपनी बैक (पीठ) करके मत बोलिए। भारी भरकम शरीर वाले पीलू मोदी का तपाक से जवाब आया, मैं तो गोल हूं।

इंदिरा गांधी का आरोप

इंदिरा गांधी अक्सर यह आरोप लगाती रहती थीं कि उनकी सरकार को विदेशी ताकतें ध्वस्त करने में जुटी हैं। पीलू मोदी उनके कट्टर विरोधियों में होते थे। जब इंदिरा गांधी ने एक बार फिर यह आरोप लगाया तो वे अगले दिन वह जो कमीज पहनकर आए उस पर लिखा हुआ था कि मैं सीआइए का एजेंट हूं। इस पर संसद में जबरदस्त हंगामा हुआ। उसके बाद आपातकाल (भारत) के समय 1975 में इन्दिरा गांधी ने पीलू मोदी को मीसा के अन्तर्गत गिरफ्तार करवा लिया था।

संसद में हास-परिहास

एक बार जब वे सदन में खड़े होकर बोल रहे थे तो उनकी पीठ आसन की ओर थी। सीताराम केसरी तुरंत खड़े हुए और कहने लगे कि यह आसन का अपमान है वे उनकी ओर पीठ किए हुए हैं। इस पर तत्कालीन अध्यक्ष ने कहा कि आप इसकी चिंता मत कीजिए क्योंकि पीलू मोदी का आकार ऐसा है कि यह पता ही नहीं चलता है कि उनकी पीठ कहा हैं व पेट कहां है, यह सुनकर सदन में ठहाके फूट पड़े। मालूम हो कि वे काफ़ी गोल मटोल थे।

जुल्फिकार अली भुट्टो से मित्रता

केंद्र सरकार के पूर्व रियासतों को दी जाने वाली प्रिवीपर्स को समाप्त करने के बाद कुछ भूतपूर्व राजाओं ने स्वतंत्र पार्टी का गठन किया था। उस पार्टी की टिकट पर बहुत से सांसद लोकसभा में आये। पीलू मोदी बताते हैं कि 26 जून, 1972 में शिमला समझौते के पहले और बाद में उनकी जुल्फिकार अली भुट्टो से कम से कम दस घंटे तक मुलाकातें चलीं। उन मुलाकातों में पीलू मोदी, उनकी पत्नी वीना और पाकिस्तान के राष्ट्रपति भुट्टो (उस समय भुट्टो राष्ट्रपति थे) रहा करते थे और वे लोग अपने पुराने दिनों और मस्तियों को याद कर खूब हंसा करते थे। पीलू मोदी एक मात्र गैर-सरकारी मेहमान थे और उनकी भुट्टो से जितनी करीबी थी भारत में और किसी व्यक्ति की नहीं थी।

शिमला समझौता

कहा जाता है कि इंदिरा गांधी और भुट्टो के बीच जिस शिमला समझौते पर दस्तख्त हुए थे, उसकी पहली प्रति देखने का गौरव पीलू मोदी को प्राप्त हुआ था। देश के दूसरे लोगों और विश्व के पत्रकारों को बाद में।

एक और प्रसंग को याद करते हुए पीलू मोदी ने बताया था कि शिखर वार्ता के कई दौर चले और टूट गये। भुट्टो के विदाई भोज के बाद एक बार फिर जब इंदिरा गांधी और भुट्टो में बातचीत चली तो अचानक दोनों नेताओं ने और वार्ता का प्रयास करने की सोची। वह प्रयास फलदायी रहा। शिमला के हिमाचल भवन में दोनों नेताओं में सहमति हुई। उस समय इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर तलाशा गया। जब वह हिमाचल भवन में नहीं मिला तो ओबराय क्लार्स होटल से मंगाया गया और उस पर शिमला समझौता टाइप हुआ। मोदी के अनुसार यह पहला समझौता है जो किसी होटल की स्टेशनरी पर टाइप हुआ था। उसके बाद पाकिस्तान सरकार की मुहर ढूंढ़ी गयी, पता चला कि वार्ता में गतिरोध के कारण सामान में बांधकर वह लाहौर भेज दी गयी। लिहाजा बिना सरकारी मुहरों के ही इस समझौते की घोषणा हुई थी।

मृत्यु

पीलू मोदी की मृत्यु 29 जनवरी, 1983 में हुआ था।

Sonu Siwach

नमस्कार दोस्तों, मैं Sonu Siwach, Jivani Hindi की Biography और History Writer हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक Graduate हूँ. मुझे History content में बहुत दिलचस्पी है और सभी पुराने content जो Biography और History से जुड़े हो मैं आपके साथ शेयर करती रहूंगी.

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