प्रतिभा देवी पाटिल की जीवनी – Pratibha Patil Biography Hindi

July 10, 2019
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प्रतिभा देवी पाटिल स्वतंत्र भारत के 60 साल के इतिहास में, देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्हे भारत का बारहवाँ निर्वाचित राष्ट्रपति बनने का गौरव भी प्राप्त हुआ हैं। उनका राष्ट्रपति बनना नारी शक्ति के संबंध में एक महत्त्वपूर्ण अध्याय साबित हुआ है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 21 जुलाई, 2007 का दिन इस कारण काफ़ी महत्त्वपूर्ण माना जाता रहेगा, क्योंकि देश की आज़ादी के साठ साल बाद एक महिला को पहली बार एक राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने का मौक़ा मिला।

25 जुलाई, 2007 को श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की और देश की पहली महिला बनने का गौरव भी प्राप्त कर लिया। प्रतिभा पाटिल कांग्रेस पार्टी के साथ काफ़ी लम्बे समय से जुड़ी रही हैं, और राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते समय वह राजस्थान की राज्यपाल थीं।तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रतिभा देवी पाटिल की जीवनी – Pratibha Patil Biography Hindi के बारे में बतायगे ।

प्रतिभा देवी पाटिल की जीवनी – Pratibha Patil Biography Hindi

प्रतिभा देवी पाटिल की जीवनी

जन्म

प्रतिभा पाटिल का जन्म 19 दिसम्बर, 1934 को ‘जलगाँव’ के ‘नदगाँव’ नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम ‘नारायण राव पाटिल‘ था, जो पेशे से सरकारी वकील थे। उस समय देश पराधीनता की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। ऐसे में यह कल्पना करना कि देश स्वाधीन होगा और स्वाधीन भारत की महामहिम राष्ट्रपति नदगाँव ग्राम की एक बेटी बनेगी, सर्वथा असम्भव ही था। उनके पति का नाम डॉक्टर देवीसिंह रामसिंह शेखावत है। इनके बच्चो का नाम राजेन्द्र सिंह शेखावत , ज्योति राठौर है।

शिक्षा

प्रतिभा पाटिल ने जलगाँव के मूलजी जेठा कालेज से स्नातकोत्तर (एम ए) और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कालेज से कानून की पढा़ई की। वे टेबल टेनिस की अच्छी खिलाड़ी थीं और उन्होंने कई अन्तर्विद्यालयी प्रतियोगिताओं में  भी विजय प्राप्त की। 1962 में वे एम जे कॉलेज में कॉलेज क्वीन चुनी गयीं थी ।उसी वर्ष उन्होंने एदलाबाद क्षेत्र से विधानसभाके चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर विजय प्राप्त की।

राजनीतिक करियर

  • श्रीमती पाटिल ने 27 वर्ष की आयु में 1962 में राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के भूतपूर्व मुख्यमंत्री यशवंत राव चव्हाण की देखरेख में शुरू किया।
  • 1962 से1985 तक वे पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं।
  • इस दौरान 1967 से1972 तक वह महाराष्ट्र सरकार में राज्यमंत्री और 1972 से 1978 तक कैबिनेट मंत्री रहीं उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।
  • उन्होंने 1962 से २1972 तक सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य, निषेध, पर्यटन, आवास और संसदीय कार्य, महाराष्‍ट्र सरकार में उप मंत्री पद पर कार्य किया।
  • वे 1972 से 1974 तक महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्‍याण विभाग, 1974 से १९७५ तक सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य और समाज कल्‍याण विभाग, 1975 -1976 तक पुनर्वास और सांस्‍कृतिक कार्य विभाग और 1977 से 1978 तक शिक्षा विभाग में कैबिनेट मंत्री के पद आसीन रहीं।
  • लेकिन जब 1979 में कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र विधान सभा में विपक्ष में पहुँची तो प्रतिभा पाटिल लगभग एक वर्ष तक विपक्ष की नेता रहीं।
  • 1982 से 1985 तक वे फिर महाराष्‍ट्र सरकार में शहरी विकास और आवास तथा1983 -1985 तक नागरिक आपूर्ति और समाज कल्‍याण के विभागों में कैबिनेट मंत्री रहीं। 1985 में वे राज्यसभा पहुँची और1986 में राज्यसभा की उप सभापति बनी।
  • 18 नवम्‍बर 1986 से 5 नवम्‍बर १९८८ तक वे सभापति और राज्‍य सभा भी रहीं।
  • वे 1986 से 1988 के बीच लाभ समिति की अध्‍यक्षा और सदस्‍य, व्‍यापार सलाहकार समिति, राज्‍य सभा भी रहीं।
  • श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल प्रदेश कांग्रेस समिति महाराष्‍ट्र की अध्यक्षा (१९८८-१९९०), राष्‍ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं ऋण संस्‍थाओं की निदेशक, भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी संघ की शासी परिषद की सदस्‍य रही हैं।
  • 1989-1990 में वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख बनीं। उन्‍हें वर्ष  1992 में दसवीं लोक सभा के लिए निर्वाचित किया गया और उन्‍होंने 1992 में अध्‍यक्षा, सदन समिति, लोक सभा के रूप में भी कार्य किया।
  • श्रीमती पाटिल को 8 नवम्बर2004 को राजस्‍थान की राज्‍यपाल के रूप में नियुक्‍त किया गया।
  • उन्‍होंने भारत के राष्‍ट्रपति पद पर निर्वाचन के लिए 22 जून 2007 को राज्‍यपाल के पद से इस्‍तीफा दे दिया।

योगदान

उन्‍होंने महिलाओं के कल्‍याण के लिए कार्य किया और मुम्‍बई, दिल्‍ली में कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास, ग्रामीण युवाओं के लाभ के लिए जलगांव में इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा श्रम साधना न्यास की स्‍थापना की। श्रीमती पाटिल ने महिला विकास महामण्‍डल, जलगांव में नेत्रहीन व्‍यक्तियों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय और विमुक्‍त जनजातियों तथा बंजारा जनजातियों के निर्धन बच्‍चों के लिए एक स्‍कूल की स्‍थापना की। श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने कई यात्राएं की है और इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ सोशल वेलफेयर कॉन्‍फ्रेंस, नैरोबी और पोर्टे रीको में भाग लिया। उन्‍होंने 1985 में इस सम्‍मेलन में शिष्‍टमण्‍डल के सदस्‍य के रूप में बुल्‍गारिया में, महिलाओं की स्थिति पर ऑस्ट्रिया के सम्‍मेलन में शिष्‍टमण्‍डल की अध्‍यक्ष के रूप में, लंदन में 1988  के दौरान आयोजित राष्‍ट्रमण्‍डलीय अधिकारी सम्‍मेलन में, चीन के बीजिंग शहर में विश्‍व महिला सम्‍मेलन में भाग लिया।

प्रतिभा पाटिल की विशेष रुचि ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था के विकास और महिलाओं के कल्‍याण के लिए है। श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने जलगांव जिले में महिला होम गार्ड का आयोजन किया और1962  में उनकी कमांडेंट थीं, वे राष्‍ट्रीय सहकारी शहरी बैंक और ऋण संस्‍थाओं की उपाध्‍यक्ष रहीं तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्‍वयन समिति, महाराष्‍ट्र की अध्‍यक्षा थीं। श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने अमरावती में नेत्रहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, निर्धन और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कक्षाओं, पिछड़े वर्गों और अन्‍य पिछड़े वर्गों के बच्‍चों के लिए नर्सरी स्‍कूल खोल कर महत्त्वपूर्ण योगदान दिया तथा किसान विज्ञान केन्‍द्र, अमरावती में किसानों को फसल उगाने की नई एवं वैज्ञानिक तकनीकें सिखाने, संगीत और कम्‍प्‍यूटर की कक्षाएं आयोजित की थी ।

विवाद

प्रतिभा पाटिल के साथ सबसे प्रथम विवाद तब जु़डा जब उन्होंने राजस्थान की एक सभा में कहा कि राजस्थान की महिलाओं को मुगलों से बचाने के लिए परदा प्रथा शुरू हुई। इतिहासकारों ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार प्रतिभा का इतिहास ज्ञान शून्य है। जबकि मुस्लिम लीग जैसे दलों ने भी इस बयान का विरोध किया। समाजवादी पार्टी ने कहा कि प्रतिभा पाटिल मुसलिम विरोधी विचारधारा रखती हैं।

प्रतिभा दूसरे विवाद में तब घिरी जब उन्होंने एक धार्मिक संगठन की सभा में अपने गुरू की आत्मा के साथ कथित संवाद की बात कही। प्रतिभा के पति देवी सिंह शेखावत पर स्कूली शिक्षक को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप है। उन पर हत्यारोपी अपने भाई को बचाने के लिए अपनी राजनीतिक पहुंच का पूरी तरह से इस्तेमाल करने का भी आरोप है। उन पर चीनी मिल कर्ज में घोटाले, इंजीनियरिंग कालेज फंड में घपले और उनके परिवार पर भूखंड हड़पने के संगीन आरोप लगाए गए हैं।

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