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कासिम सुलेमानी की जीवनी – Qasim suleymani Biography Hindi

कासिम सुलेमानी ईरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC और 1998) में ईरानी शीर्ष कमांडर थे। अमेरिका ने 3 जनवरी 2020 यानि शुक्रवार को इराक की राजधानी बगदाद के एयरपोर्ट पर हवाई हमल कर कासिम सुलेमानी को मौत के घाट उतार दिया। उन्होने अपने सैन्य करियर की शुरुआत 1980 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान की, जिसके दौरान उन्होंने अंततः 41 वें डिवीजन की कमान संभाली। लेबनान के हिजबुल्लाह को सैन्य सहायता प्रदान करते हुए, बाद में वह अलौकिक अभियानों में शामिल हो गया। 2012 में, सोलीमनी ने सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान, विशेष रूप से आईएसआईएल और उसके अपराधियों के खिलाफ अपने अभियानों में सीरियाई सरकार, एक महत्वपूर्ण ईरानी सहयोगी, को मजबूत करने में मदद की। सुलेमानी अमेरिका के कितने पुराने दुश्मन थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच खूनी जंग में उनकी अहम भूमिका थी। इस युद्ध में अमेरिका ने इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको कासिम सुलेमानी की जीवनी – Qasim suleymani Biography Hindi के बारे में बताएगे।

कासिम सुलेमानी की जीवनी – Qasim suleymani Biography Hindi

कासिम सुलेमानी की जीवनी - Qasim suleymani Biography Hindi

जन्म

कासिम सुलेमानी का जन्म 11 मार्च 1957 को Qanat-e Malek, Kerman, Imperial State of Iran में हुआ था। उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। अपनी युवावस्था में कासिम करमन शहर में चले गए और अपने पिता के कर्ज को चुकाने में मदद करने के लिए एक निर्माण श्रमिक के रूप में काम किया। उन्होंने 1975 में करमान जल संगठन के एक ठेकेदार के रूप में काम करना शुरू किया। जब उन्हे कोई काम नहीं मिलता तो वे अपना समय स्थानीय जिम में वजन उठाने और एक यात्रा उपदेशक, होजजत काम्यब, अयातुल्ला खुमैनी के एक आश्रयदाता के उपदेश में बिताया।

करियर

उन्होने अपने सैन्य करियर की शुरुआत 1980 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान की, जिसके दौरान उन्होंने अंततः 41 वें डिवीजन की कमान संभाली।  ईरान के सुदूर दक्षिणपूर्व इलाके के एक गरीब परिवार से आने वाले सुलेमानी 1979 में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड में शामिल हुए थे। इस गार्ड का गठन देश की सुरक्षा और विचारधारा को कड़ाई से लागू करने के लिए किया गया था। पड़ोसी इराक के साथ 1980 और 1988 में हुए युद्ध के दौरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड के पास राजनीतिक और आर्थिक शक्ति भी आई।

मिडिल ईस्ट में बढ़ाया ईरान का प्रभाव

मिडिल ईस्ट में ईरानी प्रभाव बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसके चलते अमेरिका के समर्थक देशों सऊदी अरब और इस्राइल को ईरान का मुकाबला करने में दिक्कते आने लगीं। इससे पहले भी उन्हें मारने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन वह हर बार बच निकले। 20 सालों के दौरान पश्चिम, इस्राइल और अरब देशों की खुफिया एजेंसियां उनके पीछे पड़ी रहीं।

अमेरिका के लिए सिरदर्द थे सुलेमानी

इराक में सुलेमानी की काफी अहम भूमिका थी। इस्लामिक स्टेट के आतंक से बगदाद को बचाने के लिए उनके नेतृत्व में ईरान समर्थित फोर्स का गठन हुआ था। जिसका नाम पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स था। जनरल सुलेमानी अमेरिका के बहुत पुराने दुश्मन थे। 1980 के दशक में ईरान और इराक के बीच हुई खूनी जंग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस युद्ध में अमेरिका ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था।

तैयार किया था पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स

इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन का मुकाबला करने के लिए उन्होंने कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट किया था। इराक में ईरान के समर्थन से तैयार पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स को जनरल सुलेमान ने ही तैयार किया था। उनका मारा जाना ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। ऐसा माना जाता है कि सुलेमानी ने हथियार बंद संगठन हिज्बुल्लाह, फिलीस्तीन में सक्रिय आतंकी संगठन हमास को समर्थन दिया था। सीरिया में बशर अल-असद सरकार को उनका समर्थन मिला हुआ था।

बगदाद हवाई अड्डे पर हमले में मारे गए

इराक की राजधानी बगदाद में हवाई अड्डे के पास हुए अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी मेजर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई है। मिसाइल से किए इस हमले में कम से कम आठ लोग मारे गए हैं। वहीं पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सिज (पीएमएफ) के डिप्टी कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस भी मारा गया है। जनरल कासिम को अमेरिका के बड़े दुश्मनों में शामिल किया जाता था।

मौत की पुष्टि

कासिम सुलेमानी के मारे जाने की पुष्टि उनके हाथ की अंगुठी से भी हुई है। वह हमेशा अपनी एक अंगुली में लाल रंग के नग वाली अंगूठी पहनते थे।

मृत्यु

कासिम सुलेमानी  को 3 जनवरी 2020 को मार गिराया गया था, जब अमेरिकी ड्रोन से दागी गई मिसाइलों ने बगदाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास उनके काफिले को निशाना बनाया था।उन्होंने अपना विमान छोड़ दिया था, जो लेबनान या सीरिया से इराक पहुंचे थे।उनके शरीर की पहचान एक अंगूठी का उपयोग करके की गई जिसे उन्होंने अपनी उंगली पर पहना था, डीएनए पुष्टि अभी भी लंबित है। मारे गए लोकप्रिय मोबिलाइजेशन फोर्सेस के चार सदस्य भी मारे गए, जिनमें अबू महदी अल-मुहांडिस, इराकी-ईरानी सैन्य कमांडर शामिल थे, जिन्होंने पीएमएफ का नेतृत्व किया।

हवाई-समर्थित इराकी शिया मिलिशिया और 2019 के -1 एयर बेस हमले के समर्थकों द्वारा बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हवाई हमले किए गए।

संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि अमेरिकी हड़ताल “राष्ट्रपति के निर्देश पर” की गई थी और यह दावा किया गया था कि सोलीमनी अमेरिकी राजनयिकों और सैन्य कर्मियों पर और हमले की योजना बना रहा था और अमेरिकी दूतावास पर हमलों को मंजूरी दे दी थी। 29 दिसंबर 2019 को इराक और सीरिया में अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में बगदाद, और यह हड़ताल भविष्य के हमलों को रोकने के लिए थी। उन्हें क्वैड फोर्स के कमांडर के रूप में इस्माइल गनी द्वारा सफल बनाया गया था।

सुलेमानी की मौत के कारण

  • जनरल सुलेमानी को दुनिया भर में चल रहे शियाओं के संघर्ष और आंदोलन का मुख्य संरक्षणकर्ता माना जाता था।
  • सुलेमानी की मौत का असर सीरिया सरकार की रणनीति स्थिति पर पद सकता है क्योंकि वह राष्ट्रपति बशरअल असद के प्रमुख सलाहकारों में से एक थे।
  • सुलेमानी ही वह शख्स थे जिनहोने इराक में आंतकी संगठन आइएस की जड़े उखाड़ने में प्रमुख भूमिका अदा की । वहाँ शियाओं का संगठन खड़ाकर उसे प्रशिक्षण और हथियारों की मदद दी। अब यही संगठन इराक में ईरान के हितों का पोषण कर रहा है। इसी संगठन का 31 दिसंबर 2019 को अमेरिकी दूतावास पर हमले के पीछे हाथ था।
  • यमन में सत्ता पर कब्जे के लिए चल रहे हुतीविद्रोहियों के संघर्ष को भी सुलेमानी का रणनीतिक और हथियारों का समर्थन प्राप्त था।
  • लेबनान का सत्ता समीकरण भी प्रभावित हो सकता है। वहाँ भी सुलेमानी ईरानी हितों को साधने का काम करते थे।

Sonu Siwach

नमस्कार दोस्तों, मैं Sonu Siwach, Jivani Hindi की Biography और History Writer हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक Graduate हूँ. मुझे History content में बहुत दिलचस्पी है और सभी पुराने content जो Biography और History से जुड़े हो मैं आपके साथ शेयर करती रहूंगी.

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