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Biography Hindi

रामस्वामी वेंकटरम की जीवनी – Ramaswamy Venkataram Biography Hindi

रामास्वामी वेंकटरम भारत के आठवें राष्ट्रपति तथा एक भारतीय वकील, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। इससे पहले वे चौथे उपराष्ट्रपति पद पर कार्यरत थे। भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक का था। वेंकटरम तमिलनाडु की औद्यागिक क्रान्ति के शिल्पकार माने जाते हैं। उन्होंने ही तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज को प्रेरित किया था कि उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाए, ताकि तमिलनाडु भारत की औद्योगिक हस्ती बन सके। उन्होंने एक पुस्तक ‘माई प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ शीर्षक से लिखी। इस पुस्तक में उन्होंने अपने राष्ट्रपतित्व काल के पाँच वर्ष की घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। तो आइए आज इस आर्टिकल में रामस्वामी वेंकटरम की जीवनी – Ramaswamy Venkataram Biography Hindi के बारे में बताएगे।

रामस्वामी वेंकटरम की जीवनी – Ramaswamy Venkataram Biography Hindi

रामस्वामी वेंकटरम की जीवनी - Ramaswamy Venkataram Biography Hindi

जन्म

रामास्वामी वेंकटरम का जन्म 4 दिसम्बर, 1910 को राजारदम गाँव, तंजावुर ज़िला, मद्रास (अब तमिलनाडु) में हुआ था। उनके पिता का नाम रामास्वामी अय्यर था। उनके पिता तंजावुर ज़िले में वकालत का पेशा करते थे। रामास्वामी वेंकटरम का विवाह 1938 ई. में जानकी देवी के साथ सम्पन्न हुआ। उनकी तीन बेटियाँ तथा एक बेटा था.  उनकी बेटियों के नाम पद्मा, लक्ष्मी एवं विजया हैं। लेकिन उनकी बेटे की 17 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी।

शिक्षा

रामास्वामी वेंकटरम ने अपनी प्राथमिक शिक्षा तंजावुर से प्राप्त की। उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास से प्राप्त की। सके बाद मद्रास के लॉ कॉलेज से वे लॉ के लिए क्वालीफाई किया।

करियर

  • शुरुआत में उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय में वकालत की और इसके बाद वर्ष 1951 में उच्चतम न्यायालय में अपना नाम दर्ज कराकर कार्य प्रारंभ किया।
  • वकालत के दौरान वे स्वाधीनता आन्दोलन से जुड़े। उन्होंने भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस द्वारा अंग्रेजी हुकुमत के विरोध में संचालित सबसे बड़े आंदोलनों में एक ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भाग लिया और वर्ष 1942 में जेल गए।
  • इस दौरान भी कानून के प्रति उनकी रूचि बनी रही और जब वर्ष 1946 में सत्ता का हस्तानान्तरण लगभग तय हो चुका था तब उन्हें वकीलों के उस दल में शामिल किया गया जिनको मलय और सिंगापोर जाकर उन भारतीय नागरिकों को अदालत में बचाने का कार्य सौंपा गया था जिनपर जापान का साथ देने का आरोप लगा था।
  • वर्ष 1947 से वर्ष 1950 तक वे मद्रास प्रोविंशियल बार फेडरेशन का सचिव रहे।
  • वकालत के कार्य से जुड़े होने के कारण आर. वेंकटरम का संपर्क राजनीति के क्षेत्र से भी बढ़ता गया।
  • उन्हें उस संविधान सभा का सदस्य चुना गया जिवर्ष े भारत के संविधान की रचना की। वर्ष 1950 में उन्हें स्वतंत्र भारत के स्थायी संसद (1950-52) के लिए चुना गया।
  • इसके बाद उन्हें देश की प्रथम संसद (1952-1957) के लिए भी चुना गया।
  • इस दौरान वे न्यूज़ीलैण्ड में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मलेन में भारतीय संसदीय प्रतिनिधि मंडल के सदस्य रहे।
  • वर्ष 1953-54 में वे कांग्रेस संसदीय दल के सचिव भी रहे।
  • वर्ष 1957 में संसद के लिए चुने जाने के बावजूद उन्होंने मद्रास राज्य में मंत्री पद के लिए त्यागपत्र दे दिया।
  • मद्रास राज्य में उन्होंने 1957 से लेकर 1967 तक विभिन्न मंत्रालयों में कार्य किया। इस दौरान वे राज्य के ऊपरी सदन ‘मद्रास विधान परिषद्’ के नेता भी रहे।
  • वेंकटरम को वर्ष 1967 में योजना आयोग का सदस्य बनाया गया। उन्हें उद्योग, श्रम, उर्जा, यातायात, परिवहन और रेलवे की जिम्मेदारी सौंपी गयी। वे वर्ष 1971 तक इस पद पर बने रहे।
  • वर्ष 1977 में वे एक बार फिर मद्रास (दक्षिण) से लोक सभा के लिए चुने गए और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष बनाये गए।
  • वे संघीय कैबिनेट के ‘पोलिटिकल अफेयर्स कमेटी’ और ‘इकनोमिक अफेयर्स कमेटी’ के सदस्य भी रहे।
  • इसके साथ-साथ उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, अंतर्राष्ट्रीय पुननिर्माण और विकास बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक के गवर्नर का कार्यभार भी संभाला।
  • वेंकटरम वर्ष 1953, 1955, 1956, 1958, 1959, 1960 और 1961 में संयुक्त राष्ट्रसंघ महासभा में भारत के प्रतिनिधि रहे।
  • वर्ष 1958 में उन्होंने जिनेवा में हुए अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक सम्मलेन के 42वें अधिवेशन में भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेत्रित्व किया।
  • वर्ष 1978 में विएना शहर में आयोजित अंतर-संसदीय सम्मलेन में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
  • वर्ष 1955 से लेकर वर्ष 1979 तक वेंकटरम संयुक्त राष्ट्र संघ प्रशावर्ष की न्यायाधिकरण का सदस्य और वर्ष 1968 से 1979 तक अध्यक्ष रहे।
  • सन 1980 में वेंकटरम एक बार फिर लोक सभा के लिए चुने गए और इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री बनाये गए। बाद में उन्हें भारत का रक्षा मंत्री चुना गया।
  • रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने भारत के मिसाइल विकास कार्क्रम को आगे बढ़ाया।
  • वे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को अंतरिक्ष कार्यक्रम से मिसाइल कार्यक्रम में लेकर आये।
  • इसके बाद उन्हें भारत का उप-राष्ट्रपति बनाया गया और उन्होने चौथे उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। फिर सन 1987 में वे भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।
  • भारत के राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक का था।
  • अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने चार प्रधानमंत्रियों के साथ कार्य किया।

पुरस्कार

  • वेंकटरम को कई विश्वविद्यालयों ने अकादमी पुरस्कार भी प्रदान किए।
  • स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के लिए उन्हें ताम्रपत्र देकर भी सम्मानित किया गया।
  • समाजवादी देशों की यात्रा का वृत्तान्त लिखने के लिए इन्हें ‘सोवियत लैंड पुरस्कार’ दिया गया।
  • कांचीपुरम के शंकराचार्य ने उन्हें ‘सत सेवा रत्न’ से सम्मानित किया।

पुस्तक

  • My Presidential Years – 1994
  • Reflections of a Statesman: Selected Post-presidential Speeches of R. Venkataraman, Former President of India
  • Jaba maiṃ Rashtrapati tha – 1994

मृत्यु

12 जनवरी 2009 को उन्हें सेना के नई दिल्ली स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिसके बाद 98 वर्ष की उम्र में 27 जनवरी 2009 को उनका देहांत हो गया।

Sonu Siwach

नमस्कार दोस्तों, मैं Sonu Siwach, Jivani Hindi की Biography और History Writer हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक Graduate हूँ. मुझे History content में बहुत दिलचस्पी है और सभी पुराने content जो Biography और History से जुड़े हो मैं आपके साथ शेयर करती रहूंगी.

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