त्रिभुवन नारायण सिंह की जीवनी – Tribhuvan Narain Singh Biography Hindi

Spread the love

त्रिभुवन नारायण सिंह एक भारतीय राजनेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। इससे पहले नारायण सिंह केंद्रीय मंत्री थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में सियासत की ऐसी बिसात बिछी कि बिना चुनावलड़े ही वे मुख्‍यमंत्री बन गए । वे राजनीति में आने से पहले स्वतंत्रता संग्राम में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। आजादी के बाद देश में जब राजनीति की नींव रखी जा रही थी,उस समय त्रिभुवन नारायण सिंह एक कुशल राजनेता के रूप में उभर रहे थे। उनका राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा। उन्होंने पहले केंद्रीय मंत्री, फिर मुख्‍यमंत्री और आखिर में राज्यपाल तक का सफर तय किया। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको त्रिभुवन नारायण सिंह की जीवनी – Tribhuvan Narain Singh Biography Hindi के बारे में बताएगे।

Read This -> बाल गंगाधर तिलक की जीवनी – Bal Gangadhar Tilak Biography Hindi

त्रिभुवन नारायण सिंह की जीवनी – Tribhuvan Narain Singh Biography Hindi

जन्म

त्रिभुवन नारायण सिंह का जन्म 8 अगस्त, 1904 को उत्तर प्रदेश, वाराणसी में हुआ था।

शिक्षा

त्रिभुवन नारायण सिंह ने महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद में उन्होने एक सफल शिक्षक के रूप में कार्य किया। त्रिभुवन नारायण सिंह ने राजनीति, पत्रकारिता, शिक्षा और समाज सेवा में अपना मुख्य योगदान दिया।

करियर

  • त्रिभुवन नारायण सिंह सामान्य निर्वाचन से पहले 1950 से 1952 तक अनंतिम संसद के सदस्य रहे।
  •  वे 1952 और 1957 में भी लोक सभा सदस्य रहे।
  • 8 जनवरी, 1965 से  लेकर 2 अप्रैल, 1970 और 3 अप्रैल, 1970 से 2 अप्रैल, 1976 तक त्रिभुवन नारायण सिंह राज्य सभा  के सदस्य रहे।
  • उन्होने 1957-1958 में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया ।
  • त्रिभुवन नारायण सिंह 1964-1967 तक केंद्रीय उद्योग और पूर्ति तथा लौह और इस्पात मंत्री रहे।
  • 18 अक्टूबर, 1970 से लेकर 3 मार्च, 1971 तक वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहे।
  • त्रिभुवन नारायण सिंह को 1977-1980 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनाया गया ।
  • त्रिभुवन नारायण सिंह एक जाने माने पत्रकार भी थे।  उन्होने ‘इण्डियन डेली टेलीग्राफ’, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ और ‘नेशनल हेराल्ड’ जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी अपना मुख्य योगदान दिया।
  • स्वतन्त्रता संग्राम की लड़ाई में भी वे कई बार जेल भी गए। 1930-1931, 1932 और 1942 में जेल की सजा काटनी पडी।

मृत्यु

3 अगस्त, 1982 को त्रिभुवन नारायण सिंह की मृत्यु हो गई।