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उमा भारती की जीवनी – Uma Bharti Biography Hindi

उमा भारती 8 दिसम्बर, 2003 को मध्य प्रदेश की 22वीं मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन वे अधिक समय तक इस पद नहीं रह सकीं और नौ महीने बाद ही उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था। उमा भारती बचपन से ही हिन्दू धार्मिक ग्रंथों और महाकाव्यों में रुचि लेने लग गई थीं, जिस कारण उनके स्वभाव और व्यक्तित्व में उनकी इस विशेषता की झलक साफ़ दिखाई देती है। उमा एक आत्म-विश्वासी और आत्म-निर्भर महिला हैं।

साध्वी की भांति वेशभूषा धारण किए उमा भारती ने अविवाहित रहकर अपना जीवन धर्म के प्रचार-प्रसार में लगाने का व्रत लिया है। वे जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय की वर्तमान केंद्रीय मंत्री हैं। सदैव भगवा वस्त्र में दिखाई देने वालीं उमा भारती का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। 2003 में भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक ‘भाजपा’ने उन्हें मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अपना अगुवा बनाया था। उस समय भाजपा ने 166 सीटों पर विजय प्राप्त की थी।रामसेतु को बचाने के लिए जुलाई, 2007 में उमा भारती ने ‘सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट‘ के विरोध में पाँच दिन की भूख हड़ताल भी की। तो आइए आज इस आर्टिकल मेन हम आपको उमा भारती के जीवन के बारे में बताएगे।

उमा भारती की जीवनी – Uma Bharti Biography Hindi

जन्म

उमा भारती का जन्म 3 मई, 1959 को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ ज़िले में हुआ था।  उमा भारती का जन्म लोधी राजपूत परिवार में हुआ था। उमा राजनीति में एक तेज-तर्रार महिला नेता के रूप में जानी जाती हैं। उमा भारती हिन्दू महाकाव्यों के विषय के बारे में काफ़ी अच्छी जानकारी रखती हैं। एक साध्वी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी उमा का ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया सेसाथ काफी अच्छे सम्बन्ध रहे है।

शिक्षा

उमा भारती ने छठी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की इसके अलावा उमा भारती धार्मिक विषयों में बहुत अधिक रुचि रखती हैं, जिसके कारण उनका संबंध देश के कई बड़े धार्मिक नेताओं के साथ भी है। राजनीतिज्ञ और हिन्दू धर्म की प्रचारक होने के अतिरिक्त उमा भारती एक समाज सेविका भी हैं।

लेखिका

उमा भारती की लेखन कार्य में भी काफी रुचि रही है। हिन्दू धर्म और उससे जुड़ी अच्छी जानकारी होने के कारण ही उमा ने अपने विचारों को किताबों में भी संग्रहित किया है। उनकी लिखी हुई अब तक तीन किताबें बाज़ार में आ चुकी हैं। इन किताबों में से एक भारत के बाहर भी प्रकाशित हो चुकी है। उनकी किताबों के नाम इस प्रकार हैं-

  • स्वामी विवेकानंद – 1972
  • पीस ऑफ़ माइंड – 1978, अफ़्रीका
  • मानव एक भक्ति का नाता – 1983

करियर

उमा ने अपने करियर की शुरुआत ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया के देख-रेख में शुरू की थी। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें एक बड़े नेता के रूप में पेश किया। उमा भारती ने 1984 में अपना पहला संसदीय चुनाव खजुराहो से लड़ा।उस समय इन्दिरा गाँधी की हत्या हुई और सारे देश में कांग्रेस के पक्ष में एक लहर बन चुकी थी। इसका परिणाम यह हुआ कि उमा को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन उन परिस्थितियों में भी उमा ने पार्टी की छवि को बनाये रखा और 1989 में उन्होने खजुराहो सीट से जीत हासिल की । उमा भारती 1991, 1996 और 1998 के चुनावों में भी खजुराहो की संसदीय सीट पर लगातार विजय प्राप्त करती रहीं। इसके बाद उन्होंने 1999 का चुनाव भोपाल से लड़ा था।

जब अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में मानव संसाधन मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, युवा एवं खेल मामलों की मंत्री तथा कोयला मंत्री आदि के रूप में काम करने का अवसर मिला। तो राजनीतिक नज़रिये से उमा भारती का क़द उस समय और भी बढ़ गया। 2003 के मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उमा भारती को अपना अगुआकार बनाया। इसमें मध्य प्रदेश की 231 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा ने 166 सीटें जीतकर सदन में तीन चौथाई बहुमत प्राप्त किया। इस प्रकार उमा भारती 8 दिसंबर, 2003 मध्य प्रदेश की 22वीं मुख्यमंत्री बनी ।

मुख्यमंत्री के पद पर उमा ज़्यादा समय तक नहीं तिक पाई और नौ माह तक मुख्यमंत्री रहने के बाद कर्नाटक में साम्प्रदायिकता फैलाने और दंगे भड़काने के आरोप के कारण उमा भारती को 23 अगस्त, 2004 को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। भाजपा ने उमा की सलाह पर उनके विशेष सहयोगी बाबूलाल गौड़ को मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। इसके बाद 29 नवम्बर, 2005 को भाजपा सरकार ने बाबूलाल गौड़ को भी मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया और शिवराज सिंह चौहान को राज्य की बागडोर सौंप दी गई।

मुख्यमंत्री के पद से हटाए जाने के कुछ समय बाद ही उमा भारती अपने ऊपर लगे आरोपों से बरी हो गईं। इसके बाद उमा ने मुख्यमंत्री का पद फिर से हासिल करने के लिए  काफी प्रयास किए, लेकिन वे असफल रही। भाजपा पार्टी में उस समय सबसे बड़ा हंगामा हुआ, जब उमा भारती ने भारतीय जनता पार्टी की एक बैठक के दौरान लालकृष्ण आडवाणी की उपस्थिति में मीडिया के पास कुर्सी से खड़े होकर पार्टी के ख़िलाफ़ शब्द कहे।

इस घटना के बाद उमा भारती को भाजपा से पहली बार निलंबित किया गया। जिसके कुछ समय बाद ही उमा भारती ने ‘भारतीय जनशक्ति पार्टी’ नाम से अपना एक अलग राजनीतिक संगठन बनाया। उमा भारती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाज़ा तब लगना शुरु हुआ, जब मध्य प्रदेश में हुए कई विधानसभा और संसदीय उपचुनावों में उनकी पार्टी के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। यहाँ तक कि वे अपनी बड़ा मलहेरा विधानसभा सीट से भी ‘भाजश’ पार्टी को भी जीता नहीं सकीं। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ और ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के कई नेता, जो यह महसूस कर रहे थे कि उमा भारती के विद्रोही तेवर हिन्दू मतों कोअलग कर सकते हैं, उन्होंने उमा भारती की भाजपा में वापसी की कोशिशें शुरु कीं दी। लेकिन भाजपा हाईकमान ने उनकी वापसी को अस्वीकार कर दिया। इस तरह अप्रैल, 2007 में किए गए समझौते के प्रयास असफल हो गए।

उमा भारती की वापसी को लेकर शुरू से ही ‘भारतीय जनता पार्टी’ में विरोधाभास की स्थिति चल रही थी, लेकिन जून, 2011 में उमा भारती को भाजपा में फिर से मिला लिया गया। इस प्रकार लगभग छ: साल के बाद उमा भारती का भाजपा में फिर से आगमन हुआ।

योगदान

  • ‘राम जन्म भूमि’ को बचाने के प्रयत्न में उमा भारती ने कई प्रभावकारी कदम उठाए। उन्होंने पार्टी से निकालने के बाद भोपाल से लेकर अयोध्या तक की कठिन पदयात्रा भी की थी।
  • उमा ने साध्वी ऋतंभरा के साथ मिलकर अयोध्या मसले पर आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के लिए उन्होंने एक सशक्त नारा भी दिया- “राम-लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे”।
  • रामसेतु को बचाने के लिए जुलाई, 2007 में उमा भारती ने ‘सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट‘ के विरोध में पाँच दिन की भूख हड़ताल भी की।

Sonu Siwach

नमस्कार दोस्तों, मैं Sonu Siwach, Jivani Hindi की Biography और History Writer हूँ. Education की बात करूँ तो मैं एक Graduate हूँ. मुझे History content में बहुत दिलचस्पी है और सभी पुराने content जो Biography और History से जुड़े हो मैं आपके साथ शेयर करती रहूंगी.

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