यशवंत सिंहा की जीवनी – Yashwant Sinha Biography Hindi

July 14, 2019
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यशवंत सिंहा राज्य के हजारीबाग के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से पुणे निर्वाचित भाजपा के एक ऐसे प्रतिभा संपन्न राजनेता है, जिन्होंने बारहवीं तथा 13वीं लोकसभा के गठन के बाद बनी वाजपेई सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। अटल बिहारी वाजपेई मंत्रिमंडल (केंद्रीय मंत्रिमंडल) में वित्त मंत्री व विदेश मंत्री रहे हैं। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको यशवंत सिंहा की जीवनी – Yashwant Sinha Biography Hindi के बारे में बताएगे।

यशवंत सिंहा की जीवनी – Yashwant Sinha Biography Hindi

यशवंत सिंहा की जीवनी

जन्म

यशवंत सिन्हा का जन्म 6 नवंबर 1937 को पटना में हुआ था। उनके पिता का नाम विपिन बिहारी शरण था और उनकी माता का नाम धन्ना देवी था। उनकी पत्नी का नाम नीलिमा सिन्हा है। और उनके बेटे का नाम का नाम जयंत सिन्हा है। यशवंत सिन्हा पढ़ने, बागवानी और लोगों से मिलने तथा अन्य कई क्षेत्रों में दिलचस्पी रखते हैं। वे व्यापक रूप से देश-दुनिया में घूमे हुए हैं कई राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधिमंडलों की अगुवाई कर चुके हैं। उन्होंने देश की ओर से कई वार्ताओं एवं आदान-प्रदान में एक अग्रणी भूमिका निभाई थी।

शिक्षा

यशवंत सिन्हा ने प्राथमिक शिक्षा Patna Collegiate School और Patna University में 1958 में राजनीति शास्त्र में अपनी मास्टर्स (स्नातकोत्तर) डिग्री प्राप्त की।इसके बाद में उन्होंने पटना विश्वविद्यालय में 1960 तक इसी विषय की शिक्षा दी।

करियर

  • यशवंत सिन्हा 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहते हुए सेवा में 24 से अधिक साल बिताए. 4 सालो तक उन्होंने सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया ।
  • बिहार सरकार के वित्त मंत्रालय में 2 सालो तक अवर सचिव तथा उप सचिव रहने के बाद उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव के रूप में कार्य किया।
  • 1971 से 1973 के बीच उन्होंने बॉन, जर्मनी के भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव (वाणिज्यिक) के रूप में कार्य किया था।
  • इसके बाद में उन्होंने 1973 से 1974 के बीच फ्रैंकफर्ट में भारत के कौंसुल जनरल के रूप में काम किया। इस क्षेत्र में लगभग सात साल काम करने के बाद उन्होंने विदेशी व्यापार और यूरोपीय आर्थिक समुदाय के साथ भारत के संबंधों के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त किया।
  • इसके बाद में उन्होंने बिहार सरकार के औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं के विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर) और भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय में काम किया जहां वे विदेशी औद्योगिक सहयोग, प्रौद्योगिकी के आयात, बौद्धिक संपदा अधिकारों और औद्योगिक स्वीकृति के मामलों के लिए जिम्मेदार थे।
  • 1980 से 1984 के बीच भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में सड़क परिवहन, बंदरगाह और जहाजरानी (शिपिंग) उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल थे।

राजनीतिक करियर

जनता दल

  • यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और जनता पार्टी के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति से जुड़ गए।
  • 1986 में उनको पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया गया और 1988 में उन्हें राज्य सभा का सदस्य चुना गया।
  • 1989 में जनता दल का गठन के बाद उनको पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया।
  • उन्होंने चन्द्र शेखर के मंत्रिमंडल में नवंबर 1990 से जून 1991 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया।

भाजपा

  • जून 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने।
  • मार्च 1998 में उनको वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उस दिन से लेकर 22 मई 2004 तक संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन तक वे विदेश मंत्री रहे।
  • उन्होंने भारतीय संसद के निचले सदन लोक सभा में बिहार ( झारखंड) के हजारीबाग निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन 2004 के चुनाव में हजारीबाग सीट से यशवंत सिन्हा की हार को एक विस्मयकारी घटना माना जाता है।
  • उन्होंने 2005 में फिर से संसद में प्रवेश किया।
  • 13 जून 2009 को उन्होंने भाजपा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

वित्त मंत्री

यशवंत सिन्हा 1 जुलाई 2002 तक वित्त मंत्री बने रहे, इसके बाद विदेश मंत्री जसवंत सिंह के साथ उनके पद की अदला-बदली कर दी गयी। अपने कार्यकाल के दौरान सिन्हा को अपनी सरकार की कुछ प्रमुख नीतिगत पहलू को वापस लेने के लिए बाध्य होना पड़ा था जिसके लिए उनकी काफी आलोचना भी की गयी. फिर भी, सिन्हा को व्यापक रूप से कई प्रमुख सुधारों को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है जिनके परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था दृढ़तापूर्वक विकास पथ पर अग्रसर हुई है। इनमें शामिल हैं वास्तविक ब्याज दरों में कमी, ऋण भुगतान पर कर में छूट, दूरसंचार क्षेत्र को स्वतंत्र करना, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लिए धन मुहैया करवाने में मदद और पेट्रोलियम उद्योग को नियंत्रण मुक्त करना। सिन्हा ऐसे प्रथम वित्त मंत्री के रूप में भी जाने जाते हैं जिसने भारतीय बजट को स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे प्रस्तुत करने की 53 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा; यह प्रथा ब्रिटिश राज के ज़माने से चली आ रही थी जिसमे भारतीय बजट को भारतीय संसद की सुविधा की बजाय ब्रिटिश संसद (1130 एएम, जीएमटी) की सुविधानुसार पेश करने की कोशिश की जाती थी।

सिन्हा ने “कन्फेशंस ऑफ ए स्वदेशी रिफॉर्मर” नामक पुस्तक में वित्त मंत्री के रूप में अपने द्वारा बिताए गए वर्षों का विस्तृत ब्यौरा दिया है।

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