मनमोहन सिंह की जीवनी – Manmohan Singh Biography Hindi

August 22, 2019
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मनमोहन सिंह एक कुशल राजनेता, विद्वान, अर्थशास्त्री और विचारक भी हैं। वे भारत के 13 वें प्रधानमंत्री भी रह चुके है। वे दो बार भारत के प्रधानमंत्री बने। इसके अतरिक्त वे वित्त मंत्रालय में सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके है। मनमोहन सिंह 72 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनाए गए। इन्होंने स्वप्न में भी यह कल्पना नहीं की थी कि वे देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वस्तुत: अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष का विरोध देखते हुए स्वयं प्रधानमंत्री बनने से इंकार करके मनमोहन सिंह को भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में अनुमोदित किया था। डॉ. मनमोहन सिंह ने 22 मई, 2004 से प्रधानमंत्री का कार्यकाल आरम्भ किया, जो अप्रैल 2009 में सफलता के साथ पूर्ण हुआ। 1987 में मनमोहन सिंह को ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया। तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको मनमोहन सिंह की जीवनी – Manmohan Singh Biography Hindi के बारे में बताएगे।

मनमोहन सिंह की जीवनी – Manmohan Singh Biography Hindi

मनमोहन सिंह की जीवनी - Manmohan Singh Biography Hindi

जन्म

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 ई. को ‘गाह’ नामक गाँव पाकिस्तान में हुआ था। उनकी माता का नाम अमृत कौर और पिता का नाम गुरुमुख सिंह था। मनमोहन सिंह की पत्नी का नाम गुरशरण कौर है। उन्होने 14 सितंबर 1958 को गुरशरण कौर के साथ शादी की थी। मनमोहन सिंह की तीन बेटियाँ हैं। उनका नाम उपिन्दर, दमन और अम्रित है।

शिक्षा

मनमोहन सिंह ने 1952 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से बी.ए. (ऑनर्स) किया और अव्वल रहे थे। 1954 में मनमोहन सिंह ने इसी यूनिवर्सिटी से एम. ए. इकॉनॉमिक्स से किया और फिर अव्वल रहे। मनमोहन सिंह इसके बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गये। जहाँ से उन्होंने पी. एच. डी. की। मनमोहन सिंह को सन् 1955 और 1957 में कैंब्रिज के सेंट जॉन्स कॉलेज में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ‘राइट्स पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। मनमोहन सिंह ने ‘नफील्ड कॉलेज’ (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी) से डी. फिल. पास किया।

करियर

1971 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये। इसके पश्चात उन्होंने भारत सरकार के कई विभागों में उच्च पद पर काम किया।

1991 में जब पी वी नरसिंहराव प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री के पद पर नियुक्त किया। इस दौरान भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। डॉ मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दी जिससे देश ने आर्थिक उदारीकरण के युग में प्रवेश किया। सबसे पहले उन्होंने लाइसेंस राज को रद् कर दिया जिसके तहत उद्योगों को कोई भी बदलाव करने से पहले सरकार से स्वीकृति लेनी पड़ती थी। उनके इस कदम से निजी उद्योगों को बहुत लाभ हुआ जिसके फलस्वरूप सरकारी उद्योगों में विनिवेश और निजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। 1998-2004 के दौरान जब भारत में बीजेपी की सरकार थी तब वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे।

प्रधानमंत्री के पद पर

2004 के आम चुनाव में लोक सभा चुनाव न जीत पाने के बावजूद मनमोहन सिंह को यूपीए की अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अनुमोदित किया। अपनी साफ़ सुथरी और ईमानदार छवि के चलते आम जनता में वे काफी लोकप्रिय बन गए। 22 मई 2004 को उन्होंने पद की शपथ ली। वित्त मंत्री पी चिदम्बरम के सहयोग से मनमोहन सिंह ने व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा में काम किया।

वर्ष 2007 में भारत का सकल घरेलू उत्पादन 9% रहा और भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था बन गया। उनके नेतृत्व में ग्रामीण नागरिकों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत हुई। इस कार्य की दुनियाभर में लोगो ने सराहना की। उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षा-क्षेत्र में भी काफी सुधार हुआ। सरकार ने पिछड़ी जाति और समाज के लोगो को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की सफल कोशिश की। हालाँकि कुछ पक्षों ने आरक्षण बिल का विरोध किया और योग्य विद्यार्थियों के लिए न्याय की मांग की। मनमोहन सिंह सरकार ने आतंकवाद को समाप्त करने के लिए कई कानून पारित किये।

2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का गठन किया गया।

2009 में इ-प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने हेतु भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का गठन किया गया जिस के तहत लोगों को बहु उद्देशीय राष्ट्रीय पहचान पत्र देने की घोषणा की गई। इस सरकार ने अलग-अलग देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाये और बरक़रार रखे। पी वी नरसिम्हाराव के कार्यकाल में शुरू की गई व्यावहारिक विदेश नीति का मौजूदा प्रकल्प में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। मनमोहन सिंह ने चीन के साथ सरहद विवाद और कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने की कोशिश की। विवादास्पद भारत-अमेरिका परमाणु समजौते के विपक्ष द्वारा बहिष्कार करने के बावजूद सरकार ने यह समजौता किया।

15वी लोक सभा के चुनाव नतीजे यूपीए के लिए बहुत सकारात्मक रहे और मनमोहन सिंह को 22 मई 2009 को एक बार फिर से भारत के प्रधानमंत्री के पद पर चुना गया। जवाहरलाल नेहरु के बाद मनमोहन सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हें 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से प्रधानमंत्री चुना गया।

इसके अतरिक्त वे वित्त मंत्रालय में सचिव, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके है।

योगदान

  • कृषि सुधार
  • गाँवों में रोज़गार
  • पर्यटन उद्योग में सुधार
  • विदेश नीति में सुधार
  • परमाणु समझौता

पुरस्कार

  • 1982 में सेंट जोंस कॉलेज, केम्ब्रिज, ने मनमोहन सिंह को मानद सदस्यता दी।
  • पांच साल बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
  • 1994 में उन्हें डिस्टिंगग्विश्ट फेलो ऑफ़ लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से सम्मानित किया गया।
  • 1999 में डॉ मनमोहन सिंह को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संस्था, नई दिल्ली, द्वारा सदस्यता दी गई।
  • 2002 में उन्हें अन्ना साहेब चिरमुले ट्रस्ट की ओर से अन्ना साहेब चिरमुले पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दो वर्ष बाद भारतीय
  • संसदीय दल की तरफ से उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार दिया गया।
  • 2010 में उन्हें अपील ऑफ़ कान्शन्स फौन्डेशन की ओर से वर्ल्ड स्टैट्स्मन पुरस्कार प्रदान किया गया।

पुस्तक

  • The Quest for Equity in Development – 1986
  • Global Trading System, the WTO, and the Developing Countries – 1999
  • Prime Minister Manmohan Singh: December 2010 to May 2011 – 2005
  • To the Nation, for the Nation: Selections from Selected Speeches of Dr. Manmohan Singh – 2006
  • Changing India – 2019

विवाद

2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला – टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, जो स्वतन्त्र भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला है उस घोटाले में भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रुपये का घपला हुआ है। इस घोटाले में विपक्ष के भारी दवाव के चलते मनमोहन सरकार में संचार मन्त्री ए० राजा को न केवल अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, अपितु उन्हें जेल भी जाना पडा। केवल इतना ही नहीं, भारतीय उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में प्रधानमन्त्री सिंह की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। इसके अतिरिक्त टूजी स्पेक्ट्रम आवण्टन को लेकर संचार मन्त्री ए० राजा की नियुक्ति के लिये हुई पैरवी के सम्बन्ध में नीरा राडिया, पत्रकारों, नेताओं और उद्योगपतियों से बातचीत के बाद डॉ॰ सिंह की सरकार भी कटघरे में आ गयी थी।

कोयला आबंटन घोटाला – मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश में कोयला आवंटन के नाम पर करीब 26 लाख करोड़ रुपये की लूट हुई और सारा कुछ प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ क्योंकि यह मंत्रालय उन्हीं के पास है।

इस महाघोटाले का राज है कोयले का कैप्टिव ब्लॉक, जिसमें निजी क्षेत्र को उनकी मर्जी के मुताबिक ब्लॉक आवंटित कर दिया गया। इस कैप्टिव ब्लॉक नीति का फायदा हिंडाल्को, जेपी पावर, जिंदल पावर, जीवीके पावर और एस्सार आदि जैसी कंपनियों ने जोरदार तरीके से उठाया। यह नीति खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दिमाग की उपज थी।

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