राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जीवनी – Rajendra Prasad Shukla Biography Hindi

July 19, 2019
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राजेंद्र प्रसाद शुक्ला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वे कई बार मध्य प्रदेश विधानसभा के विधायक भी रह चुके थे। राजेंद्र प्रसाद शुक्ला करगी रोड कोटा के प्रतिष्ठित नेता थे।तो आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जीवनी – Rajendra Prasad Shukla Biography Hindi के बारे में बताएंगे।

राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जीवनी – Rajendra Prasad Shukla Biography Hindi

राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की जीवनी

जन्म

राजेंद्र प्रसाद शुक्ला का जन्म 10 फरवरी 1930 को बिलासपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम  शरी सिद्धनाथ शुक्ला था।

शिक्षा

राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने एल.एल.बी. और 1953 में वकालत की पढ़ाई शुरू कि वह कुशल वक्ता, विचारक अपने जीवन में गांधी दर्शन का अनुकरण करते थे।

करियर

  • राजेंद्र प्रसाद शुक्ला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे वे कई बार मध्य प्रदेश विधानसभा के विधायक रह चुके थे।
  • राजेंद्र प्रसाद शुक्ला 1980 के दशक के बीच में मंत्री के रूप में और 1980 के दशक के मध्य में वहां के अध्यक्ष चुने गए बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद में कोटा बिलासपुर से छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए चुने गए और छत्तीसगढ़ के पहले अध्यक्ष बने।
  • राजेंद्र प्रसाद शुक्ला करगी रोड कोटा के एक प्रतिष्ठित नेता भी थे।
  • वे जिला कांग्रेस बिलासपुर के अध्यक्ष रहे,
  • फिर उन्होने अपने भूदान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
  • 1952-57 में वे जिला कृषि संगठन के अध्यक्ष रहे।
  • 1958 में श्री शुक्ला सहकारी गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष एवं सचिव रहे।
  • 1938 से 1964 तक आप केंद्रीय सहकारी बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष व सागर विश्वविद्यालय के व्यवस्थापन समिति के सदस्य रहे।
  • 1967 से 1972 तक आप विधानसभा के सदस्य रहे 5 विधान सभा में राज्य परिवहन निगम की जांच समिति के सदस्य व संभागीय खादी ग्रामोद्योग संस्थान बिलासपुर के अध्यक्ष रहे हैं।
  • 1978 से बिलासपुर जिला कांग्रेस समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राष्ट्रीय सहकारी निर्माण फेडरेशन, नई दिल्ली के संचालक राज्य सहकारी गृह निर्माण मंडल भोपाल के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
  • 1985 में कोतार (बिलासपुर) से तीसरी बार विधानसभा सदस्य और सर्वसमिति से विधान सभा अध्यक्ष बने।
  • 1992 में मास्को सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि के रूप में गए।

साहित्य सृजन

  • काव्य संग्रह- गमक
  • निबंध संग्रह-  लीक से हटकर
  • संसदीय प्रणाली और कार्यप्रणाली पर  मौलिक ग्रंथ “मेरी विचार यात्रा” अधिकार लेखन
  • संस्कृति का प्रवाह- कहानी संग्रह
  • गांव की गोद में- आत्मकथा का पहला भाग

संस्कृति का प्रवाह, गांव की गोद में यह दोनों 9 फरवरी 2002 को प्रकाशित हुई।

रचनाएं

  • गांव गांव के खेत हरे है
  • आ तेरा शृंगार सजा दो
  •  माटी का प्यार अमोल रे
  •  अभिनंदन है अभिनंदन है
  • माटी का मुझे दुलार मिले
  • भूमि दान कर चलो जहान जी उठे
  • नए वर्ष का नव विहान, आदि उनके द्वारा लिखी हुई रचनाएं है।

पुरस्कार

  • 1994 में अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन द्वारा भारत भाषा भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • इंटरनेशनल फ्रेंडशिप सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा जून 1995 में विकास रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मृत्यु

राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मृत्यु 20 अगस्त 2006 में हुई थी।

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